Category: shayri

Shayri

गुमराह रहने का भी एक सुकून हुआ करता था,दिल मासूम था, हर ख़्वाब जुनून हुआ करता था।समझदार बने तो ज़िंदगी भारी-सी हो गई,नादान दिल ही था जो हर ग़म से…

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लाऊँ कहाँ से अल्फाज़ तेरी तारीफ मे लिखने को… चांद भी संवरता है हर रोज तेरे जैसा दिखने को….!!!!

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शायरों के ऐहसास बड़े अज़ीब होते हैं साहेब वो मुस्कुराहट में भी ग़म का आगाज़ कर देते हैं

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एक अरसे पहले चैन से हम भी सोया करते थे, फिर मुहब्बत हुई और रातों की नींद उड़ गई!!!

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बड़ी मासूमियत सेउसने पूछाजो कहीं के नहीं रहतेवो कहां रहते है

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अँधेरों का शोर बहुत होगा,पर दीये की एक लौ काफ़ी है।टूटने से पहले बुझ जाए,ऐसा कभी हुआ नहीं है।

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मेहनत का फल, मुसीबतों का हल और आने वाला कल सब ईश्वर के हाथ मे है.. उम्मीद कभी संसार से नहीं संसार को रचने वाले से रखनी चाहिए..!

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तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आतीं हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आतीं…

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करूँ क्यों फ़िक्र की मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगीजहाँ होगी महफिल मेरे यारो की मेरी रूह वहाँ मिलेगी

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भाग्य बदल जाता है,जब इरादे मजबूत हों तो,वरना जीवन बीत जाता है,किस्मत को दोष देने में..