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shayri

Shayri

गुमराह रहने का भी एक सुकून हुआ करता था,
दिल मासूम था, हर ख़्वाब जुनून हुआ करता था।
समझदार बने तो ज़िंदगी भारी-सी हो गई,
नादान दिल ही था जो हर ग़म से बेख़बर हुआ करता था।

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