गुमराह रहने का भी एक सुकून हुआ करता था,दिल मासूम था, हर ख़्वाब जुनून हुआ करता था।समझदार बने तो ज़िंदगी भारी-सी हो गई,नादान दिल ही था जो हर ग़म से बेख़बर हुआ करता था। Post navigation Shayri