प्रेम वो है जहाँ
किसी के साथ रहने के लिए कोई कारण नहीं ढूँढना पड़ता,और दूर होने पर भी वो इंसान दिल के अंदर से निकल नहीं पाता।

प्रेम वो नहीं जो सिर्फ शब्दों में दिखे,
प्रेम वो है जो व्यवहार में महसूस हो
जहाँ हर छोटी बात में अपनेपन की खुशबू हो, हर खामोशी में एक अपनापन हो,हर इंतज़ार में एक मिठास हो।

प्रेम वो है जहाँ
तुम्हें बार-बार खुद को साबित नहीं करना पड़ता, जहाँ तुम्हारा दोष भी समझा जाता है और तुम्हारी चुप्पी भी पढ़ ली जाती है।

प्रेम किसी को पाना नहीं…
उसके लिए अपने भीतर जगह बनाना है।
उसकी कमियों को स्वीकारना है,
उसकी परेशानियों को अपना लेना है,उसकी हँसी को तुमसे जोड़ देना है।..

By Bhaveer