जिन्हें कभी मेरी हर साँस की खबर थी,उन्हें क्या पता मैं औरों के लिए कितना अनजान था। कद्र तब हुई मेरी दूरी की,जब मैं भी उनकी ज़िंदगी में “कोई और” बन गया। Post navigation शायरी shayri