शहर में नीम के पेड़ कम हो रहे हैं और घरों में कड़वाहट बढ़ रही है, जबान में मिठास कम हो रही है और लोगों में शुगर बढ़ रही है बुराई बड़ी मीठी है, उसकी चाहत कम नहीं होती सच्चाई बड़ी कड़वी है, सबको हजम नहीं होती इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि हमारे पास कितने संसाधन हैं अगर हमें उनका इस्तेमाल करना नहीं आता, तो वे कभी भी पर्याप्त नहीं होंगे अंत ही आरंभ है, इच्छा ही मोह है, अहंकार ही पतन है, ज्ञान ही प्रकाश है, अपेक्षाएं ही दुख हैं और संतोष ही सुख है Post navigation thoughts